राम तेरी गंगा मैली कर दी हमने

जिसके दो बूँद जल ने सारा गन्दा जला डाला
उसी गंगा माँ के मुंह में भी हमने मैला डाला
बंजर धरती का कोप आने वाली नस्ले भोगेंगी
आज के लिए हमने कल को नरक बना डाला।

…..
एक अरसा हुआ मुझे
उगता सूरज और
सुनहरी शाम देखे हुए
आठों पहर ज़र्द रौशनी
आँखों की साथी है ।

बे हवा पिंजरे से फ्लैट में
सवेरे से ही
अनगिनत वाहनों
कारखानों से उगलता धुंआ
शहर की भीड़ का साथ
जो कि खुद है
गमशुदा मंजिलों का अबूझ कारवां
बेतरतीब विकास के सफर में है।

अजनबी राह के मुसाफिरों
छांव की उम्मीद मत रखना
दरख़्त सब कट गए हैं
राज मार्ग और भी चौड़े करने हैं
खेतों में हरियाली की जगह
शहरियत के गंदमैले रंग भरने हैं
पर्यावरण के जिस्म से
फेफड़े काटने के कसूरवारों
ज़हर हो रही हवाओं के गर्म झोंके
साँसों पर भारी चले हैं
अनियंत्रित विकास के बल खाते नाग
जल्दी ही सबको डसने हैं ।

बेकाबू प्रगति रथ दौड़ाने वालों ने
वे नाले पाट दिए
जो तालाबों की जीवन रेखा थे
कुओं के सब रस्से काट दिए
जिनसे पनघटों पर रौनक थी
भोले गीतों के सुर थे सुहाने
नाज़ुक चूडियों की खनक थी
धरती की छाती में
लाखों नासूर करके
जल जो कि जीवन है
खोता जा रहा है
बंगलों के लानों पर बिखर के
तरस रहे हैं झुग्गियों में प्यासे मटके
क्या कीजे?

नदियों के मुँह पर ताले लगा कर
सिचाई परियोजनाए बनी हज़ारों
फिर भी खेत रहे प्यासे
रोका गया बहाव आज़ाद जल का
ज़रा सी बिजली के लोभ में
मुरझाया हर बेल बूटा
धरती माँ के आँचल का
मरू बनी सूख के हर सरिता।

गंगा तक को नहीं बख्शा
जिसकी दो बूंदों से
सारे पाप कट जाते है
उसको भी गन्दा किया
इंसानी लालच ने
चमड़े के कारखानों तक के मैले ने
पवित्रता को नापाक किया
फैक्ट्रियों की विषैली झूठन बहा कर
आस्था का दामन चाक किया
इंसानी लालच ने।

विकास किसको प्यारा नहीं
कौन नही चाहता बेहतर जिंदगी
मुफ़लिसी किसी को गवारा नहीं
दूर हो तम असमान सुविधाओं का
सबको मिले बराबर रोशनी
कागजों में ही न हो वृक्षारोपण
सर्वांग फैले हरियाली
फिर रूठे बादल लौटें
बरखा झूम के बरसे
शहर बसें लाख बसें
सुध ली जाए मिटते खेतों की भी
विकास के नाम पर
केवल घूस और कमीशन भरा
उबड़खाबड़ आज ही न सुधारा जाए
ईमानदारी से सोच हो कल की
भविष्य के सपनों को
यथार्थ की ज़मीन पर संवारा जाए।

(रफत आलम)

One Comment to “राम तेरी गंगा मैली कर दी हमने”

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: