वह लड़की

बहुत मन करता है
उस लड़की से मिलने का
जिससे हुआ था पहली बार प्यार
मुझे।

सुनता हूँ
कोई कमी नहीं है उसके पास
गाड़ी-घोड़ा यानि कि कार-बँगला, नौकर-चाकर
अफसर पति और
खूबसूरत मेधावी दो बच्चे
मतलब यह कि वह सब कुछ
जो किसी सम्पन्न के पास
हो सकता है, होना चाहिये
वह सब कुछ उसके पास है।

शायद मेरे उन आसमानी वायदों से भी अधिक
जो मैंने उससे किये थे।
मेरे वायदे एक दिन में किये वायदे नहीं थे
धीरे-धीरे इकट्ठा होते गये थे।

मेरा प्यार
अचानक पहली दृष्टि में हुआ प्यार नहीं था
हम बड़े हुये थे अपने प्यार के साथ-साथ
खेलते-कूदते, लड़ते-झगड़ते
और एक-दूसरे को पढ़ते।

हम बहादुर थे
हमें डर नहीं था दुनिया का
हमने बसानी चाही थी खुद अपनी दुनिया
कि अचानक वह खो गयी
वही लड़की
जिससे हुआ था मुझे प्यार पहली बार।

तबसे
हाँ, तभी से खोज रहा हूँ वही लड़की
दूसरी लड़कियों में
नहीं, दूसरी औरतों में।

वह लड़की दिखती- सी है दूर से
मगर पास जाते ही
खो जाती है
दूसरी हो जाती है।

अन्वेषकों- सी जाती अपनी ज़िंदगी के दौरान
मैं सुनता रहा दूसरों से कि
वह लड़की अब भी उसी दुनिया में है
जिससे हम डरते नहीं थे कभी भी।

सुनता आ रहा हूँ
सुखी है वह अपने आस-पास के शाही ठाट से
औरतें इन्ही सबसे तो सुखी रहती हैं।
फिर भी
मेरा मन करता है कि
मैं अपने उस कस्बेनुमा शहर के छोटे-से बाज़ार में जाऊँ
और खरीदूँ उसके लिये
गहरे लाल रंगों की ग्यारह चूड़ियाँ
एक शीशी कन्नौजी इत्र
और लाल-लाल आलता
एक कोई पतले किनारों वाली एकलाई
और सब कुछ एक छोटी- सी गठरी में लिये हुए
पहुँच जाऊँ उसके दरवाजे पर
देने एक बहुत छोटी-सी भेंट शगुन जैसी
अपने सुखी सम्पन्न प्यार को।
उस लड़की को
जिसने मुझसे भी किया था प्यार पहली बार।

वह लड़की
सुनता हूँ
दुनिया में कहीं है
और बहुत सुखी है
न जाने कैसे…मेरे बिना…
वह लड़की।

{कृष्ण बिहारी}

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