Archive for मई 1st, 2011

मई 1, 2011

जीवन-मृत्यु

जीवन
साँसों की सरगम
मृत्यु
सुर की चिरस्थाई
खामोशी।
……

अनिश्चित सफर की
गाड़ी है जीवन
मुसाफिरों को
अक्सर
रास्ते में उतरते देखा है।
……

बेवफा प्रेयसी है
मृत्यु
फिर भी
इसकी बाहों में आई नींद
कभी टूटती नहीं।
……

गीत गाते रहो
साज़ बजाते रहो
खामोश होने है आखिर
गायक, वाद्य और सुर।
……

अनोखा खेल
अबूझ चालें
तलिस्मी घालमेल
अनूठा खिलाडी
बिसात उलट कर कहता है
मैं जीता।

(रफत आलम)

मई 1, 2011

भ्रष्टाचार का प्राइमरी स्कूल

जन्म लेते ही बेईमान बना रहा है बाप
बच्चे को लाके हराम खिला रहा है बाप
जहर का पला सर्प के सिवा क्या बनेगा
आम की आस में बबूल उगा रहा है बाप

क़र्ज़ बाप के नाम का चुकायेगा ही सही
पैसा दे के आया है घूस खायगा ही सही
नौकरी की पहली ईंट बेईमानी ने रखी है
ये भ्रष्टाचार का महल बनायगा ही सही

(रफत आलम)

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