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अप्रैल 23, 2011

प्राइवेट बनती कॉमन वेल्थ

नेता जी
घर के आगे
एक्सप्रैस रेल रुकवाकर
उतर गए
गुनाह हुआ क्या?

नेता जी की मर्ज़ी से रोज
निम्नस्तरीय गोली, टैंक, तोप, जहाज़
दवाइयां-आपरेशन उपकरण
दस गुना दामों में
खरीदे जा रहे हैं
अंतहीन सूची है अनियमिताओं की।

“कॉमन वेल्थ”
“प्राइवेट’ काली पूँजी बन कर
दफन हो रही है
भ्रष्टाचार के घिनौने अन्धकार में!

नई बात नहीं हैं घोटाले
किसे परवाह है
जनता तो ऊँन उतराती भेड़ है
जिसके मांस पर आखिर
इन कसाइयों का पुश्तैनी हक है

भूख, प्यास, बेघरी और फटेहाली को
मालिक की देन मान कर
लहू–पसीने को बस चिंता है
कैसे शाम की रोटी का जुगाड़ हो
इन किस्मत के मारों को क्या पता
उनके हिस्से की धूप
खुद सूरज खा रहा है।

फैले हुए शापित हाथों के लिए
दान में मिला खाने का पैकेट
कोहिनूर से कम नहीं
कल ही देखना चुनाव् के दिन
ये सभी सर्वहारा
ताड़ी की बोतल या
एक अदद साड़ी के बदले
नेता जी को फिर चुन लायेंगे।

(रफत आलम)

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