बगुलाभगत आये रे!

वो जो बेचते थे
जहर अब तक,
सुना है
पहने झक सफेद कपड़े
डाले गले में आला
महामारी भगाने की
अपनी क्षमता का
विज्ञापन करते
घूम रहे हैं।

भटका दिये गये थे
बहुरुपिये के स्वर्ण मृग रुपी कौशल से राम
हर ली गयी थी
साधु वेश में आये रावण के छल से सीता
दौ सौ साल लूटा
दास बनाकर भारत को
झुककर व्यापार करने की
इजाज़त लेने आये लूटेरों ने।

विदेशी लूटेरे चले गये
विशालकाय तिजोरियाँ खाली छोड़कर
पर उन पर जल्द कब्जे हो गये
वे फिर से भरी रहने लगीं
देश फिर से लूटा जाने लगा,
लूटा जाता रहा है दशकों से।

डाकुओं के खिलाफ आवाज़ें उठी
तो
छलिये रुप बदल सामने आ गये हैं
जो कहते न थकते थे
“पैसा खुदा तो नहीं
पर खुदा की कसम
खुदा से कम भी नहीं”
वे कस्में खा रहे हैं
रुखी सूखी खायेंगे
पानी पीकर
देश का स्वास्थ्य ठीक करेंगे,
भ्रष्ट हो गया है
यह देश
इसे ठीक करेंगे!

होशियार
सियार हैं ये
शेर की खाल ओढ़े हुये
सामने से नहीं
आदतन फिर से
लोगों की
पीठ में ही खंजर भोकेंगे
लोगों की
मिट्टी की
गुल्लकें
ले भागेंगे
हजारों मील दूर रखी
अपनी तिजोरियाँ भरने के लिये।

जाग जाओ
वरना ये फिर ठगेंगे
इंतजार बेकार है
किसी भगीरथ का
जो लाकर दे पावन गंगा
अब तो हरेक को
अपने ही अंदर एक भगीरथ
जन्माना होगा
जो खुद को भी श्वेत धवल बनाये
और आसपास की गंदगी भी
दूर बहा दे।

पहचान लो इस बात को
डर गये हैं कुटिल भ्रष्टाचारी
धूर्तता दिखा रहे हैं
इनके झांसे में न आ जाना
इनका सिर्फ ऊपरी चोला ही सफेद है
ये हंस नहीं
जो दूध और पानी को अलग कर दें
बल्कि ये तो बगुलेभगत हैं
जो गिद्ध दृष्टि गड़ाये हुये हैं
देश की विरासत पर।

सावधान ये करेंगे
हर संभव प्रयास
जनता को बरगलाने का
ताकि बनी रहे इनकी सत्ता
आने वाले कई दशकों तक
दबा-कुचला रहे
आम आदमी इनकी
जूतियों तले
साँस भी ले
तो इनके रहमोकरम
का शुक्रिया अदा करके।

वक्त्त आ गया है जब
इन्हे जाल में फँसा कर
सीमित करनी होगी इनकी उड़ान
तभी लौट पायेगा
इस देश का आत्म सम्मान
असमंजस की घड़ियाँ गिनने का वक्त चला गया
यह अवसर है
धर्म युद्ध में हिस्सा लेने का
जीत हासिल कर
एक नये युग का सूत्रपात करने का।

…[राकेश]

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10s टिप्पणियाँ to “बगुलाभगत आये रे!”

  1. समय की समय पर और समय रहते पहचान कर लेने में ही समझदारी है.

  2. sahi bat vyangy ka sahara lekar kah di apne ” sach hai duniya valon ham hai anari “

  3. इनका सिर्फ ऊपरी चोला ही सफेद है
    ये हंस नहीं
    जो दूध और पानी को अलग कर दें
    बल्कि ये तो बगुलेभगत हैं
    जो गिद्ध दृष्टि गड़ाये हुये हैं
    देश की विरासत पर। पूरी रचना ही खरी और सामयिक है .काश लोग जाग सकें समझ सकें .बहरहाल शुक्रिया अच्छी कोशिश के लिए

  4. धन्यवाद योगेन्द्र जी

  5. राहुल जी,
    सत्य है.. समय पर सही रुख की पहचान जरुरी और श्रेयकर है

  6. सुनील जी,
    धन्यवाद

    शातिर न हो, अनाड़ी ही रहे पर चेतना का वास हो उसमें भी

  7. पैसा खुदा तो नहीं
    पर खुदा की कसम
    खुदा से कम भी नहीं

    corrupt leaders se desh ko bachana bahut jaruri hai public ko corruption ko ukhar dena chahiye

  8. पंकज जी,
    धन्यवाद,

    खरी बात है – भ्रष्ट नेताओं का भारतीय राजनीतिक परिदृष्य से हट जाना वक्त की मांग है। इन भ्रष्ट नेताओं के कारण भारत की पूरी की पूरी राजनीतिक प्रणाली पर कालिख पुती हुयी नज़र आ रही है। ईमानदार नेताओं को जंग छेड़ देनी चाहिये इन भ्रष्ट ताकतों के खिलाफ। आज जनता भी साथ है। लोकतंत्र के ठोस अस्तित्व के लिये ऐसी जंग लाज़िम है।

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