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अप्रैल 10, 2011

सब यहीं छूट जाना है

खाली पेट हैं करोडों
बस कुछ एक खलियान भरे हैं
फैले हुए हाथों की गिनती ही नहीं
तिजोरियों पर पहरे है

ये बात भी सही
सब कुछ यही छोड़ना है
कितना भी सफल हो जीवन
नाम साँसों का दौड़ना है

यहाँ खाली हाथों का नाम भीख
नाकामी अधिकतर उमंगों का अंजाम है
अक्सर बेईमान रास्तों पे चल कर
सफलता कुछ एक के नाम है

धरती पर बन गए हैं हज़ारों खुदा
बंटवारा जो खुदी का नहीं करते
अपनी रौशनी या रोटी
महरूमों को बख्शा नही करते

मुकद्दर की नाइंसाफी तो देखिये
गरीबी नादारी मुफलिसी करोड़ों के नाम
एक है बस मसान का रास्ता वरना
अमीरी-अय्याशी कुछ ही बन्दों के नाम

कोई नही सोचता
जिंदगी चंद दिनों का फ़साना है
महल हो कि झोपडी
सब यहीँ छोड जाना है

फिर भी सदा का शापित आदमी
बंटवारा खुशियों का नहीं करता
रंगों का हुनर पा लिया लेकिन
रोती तस्वीरों में मुस्कान नहीं भरता

(रफत आलम)

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