खुश तो बहुत होगे आज इजिप्ट : रघुवीर सहाय

ऐसा हो जाता है कि लोग अपने आप को खुदा समझने लगते हैं और ऐसी गलतफहमी पाल बैठते हैं कि देश का भला केवल वे ही कर सकते हैं और जो उनके साथ नहीं हैं वे देश के दुश्मन हैं। ऐसे व्यक्त्ति भारत में भी हैं। और ऐसी संस्थायें भी भारत में भी हैं जो देशभक्त्ति पर अपना एकाधिकार समझती हैं और समझती हैं कि जो उनके तौर तरीकों का समर्थन नहीं करते वे भारतीय तो हैं ही नहीं बल्कि देशद्रोही हैं।

ऐसे नेता होते हैं जो सत्ता की शक्त्ति तो जनहित की लुभावनी बातें करके पाते हैं पर सत्ता की बागडोर पाने के बाद वे एकाधिकार प्राप्त करने की साजिश करते हैं और निरंकुशता की ओर बढ़ते जाते हैं। दुनिया का हर ऐशो आराम उन्हे मिल जाता है पर धीरे धीरे वे जनता से मिलने वाले सबसे जरुरी भाव खोते जाते हैं। जनता में उनके प्रति विश्वास और सम्मान खो जाता है और वे सिर्फ और सिर्फ सत्ता की निरंकुश शक्त्ति की बदौलत देश के शाषक बने रहते हैं।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी. पी. सिंह ने सत्ता से चिपकने वाले नेताओं की ऐसी चिपकू प्रवृत्ति की तरफ इशारा करते हुये एक बड़ी अच्छी कविता लिखी थी।

उसने उसकी गली नहीं छोड़ी
अब भी वहीं चिपका है
फटे इश्तेहार की तरह
अच्छा हुआ मैं पहले
निकल आया
नहीं तो मेरा भी वही हाल होता।

एक वक्त्त आता है जब नेताओं को खुद ही नेतागिरी का भ्रम तोड़ देना चाहिये और सत्ता की राजनीति से दूर हट जाना चाहिये ताकि भरपूर ऊर्जा और नये विचारों एवम ताजगी से भरी नेतृत्व क्षमता आकर लोगों को नेतृत्व दे सके और भविष्य के समय का निर्माण कर सके।

होस्नी मुबारक सत्ता के गलियारे से खदेड़ दिये गये और अपनी भद पिटवा कर वे बाकी का जीवन एक कलंकित शाषक के रुप में जियेंगे।

परिवर्तन कुछ अच्छा ही लेकर आयेगा। रुके पानी के सड़ने से उत्पन्न दुर्गंध में कुछ कमी आयेगी। इजिप्ट कुछ आगे की ओर बढ़ेगा।

मुबारक की विदाई मुबारक साबित हो इजिप्ट के लिये।

कल तक जो जनता सड़कों पर संघर्ष कर रही थी। मुबारक की पुलिस की ज्यादतियाँ सहन कर रही थी आज वही जनता विजेता बनकर उन्ही सड़कों पर नाच रही है, जश्न मना रही है।

जीवन में आने वाले ऐसे ही मौकों के लिये ही तो रघुवीर सहाय ने एक बेशकीमती कविता की रचना की थी। उनकी कविता जीवन के पुनर्निमाण का उत्सव मनाती है।

आज फिर शुरु हुआ जीवन
आज मैंने एक छोटी सी सरल सी कविता पढ़ी
आज मैंने सूरज को डूबते देर तक देखा
जी भर आज मैंने शीतल जल से स्नान किया
आज एक छोटी सी बच्ची आयी
किलक मेरे कंधे चढ़ी
आज मैंने आदि से अंत तक
एक पूरा गान किया
आज फिर जीवन शुरु हुआ।

पुनश्च : चित्र स्त्रोत – totallycoolpix.com

3 टिप्पणियाँ to “खुश तो बहुत होगे आज इजिप्ट : रघुवीर सहाय”

  1. सार्थक और सामयिक आलेख जिसका सन्देश हमें भी सीधा मिल रहा है .मोहतरम हजरात की कविताओं और वीडियो में जान पड़ गयी है पोस्ट में . बहुत ज़रूरी है हमारे देश में भी सुधार होना पर क्या हो .अवाम इतने बटे हुए हैं के क्रांति के सोच भी पागल का ख्याल सी लगती है .साफ़ दिख रहा है बर्बादी का मंज़र पर क्या हो .स्थति इतनी बदतर हो गयी है कि जेसा रादिया टेपों से उजागर हुआ है चोथा स्तंभ भी बिकाऊ हो गया है .सो बस सहते रहना है और लुटते रहना है ,शायद यही हमारा भाग्य है .बाकि मिस्र कि जनता को मुबारक पर जाने ऐसा न हो वे भी कुए से निकल कर खाई में न जा पड़े जेसा कि अक्सर ऐसे देशों में होता देख गया है .फिर भी यह कदम सारी इंसानियत को जगाने खास तोर पर हमें ,मील का पत्थर साबित हो सकता है काश हम जागें .

  2. मुबारक की विदाई मुबारक साबित हो इजिप्ट के लिये।…..
    आमीन…

  3. सेना प्रयास कर सकती है ज्यादा से ज्यादा शक्त्ति अपने हाथों में रखने की।
    बहुत सारी अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शक्क्तियाँ भी अपने खेल खेलेंगी पर अंततः यह एक जन-आंदोलन के फलस्वरुप हो पाया है।
    जनता में भले ही एक किस्म की सामुहिक मासूमियत हो पर
    जो जनता एक बार उठ सकती है वह ठगे जाने पर बार-बार उठकर हालात लोकतंत्र की ओर ले जा सकती है।
    कुछ खामियों के बावजूद लोकतंत्र ही एकमात्र रास्ता है जिसमें हर तबका खुल कर साँस ले सकता है बाकी सब रास्ते चुनींदा लोगों को फायदा पहुँचाने वाले होते हैं या बन जाते हैं।
    अभी तो इजिप्ट को आशा के साथ जीना है।
    परिवर्तन कुछ अच्छा लेकर ही आयेगा।

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