Archive for फ़रवरी 10th, 2011

फ़रवरी 10, 2011

जिंदगी के निराले रंग-ढ़ंग

सी.डी.’ जैसी जिंदगी
निश्चित अवधि तक
दुःख–सुख भरे गीत गाती है
कई बार
स्क्रेच’ लग कर
बीच में ही रुक जाती है।

* * *

टायर’ सा जीवन
भाग रहा है
गतिमय
दिन-रात के सफर में
अचानक ’पंक्चर’ से
फुस्स भी हो जाता है।

* * *

कम्प्यूटर’ सा जीवन
संजोता है
सब हिसाब-किताब
वायरस’ अटैक से
करप्ट’ होकर
ब्लैंक’ हो जाता है
कई बार।

* * *

रेलगाड़ी सी जिंदगी
स्टेशन दर स्टेशन गुज़रती
मंजिल की तरफ
कई बार
हादसे की ’चेन’ से
अचानक रुक जाती है।

* * *

जिंदगी!
मौसम की आज़माइश में
हीटर’ की तरह तप्त
कूलर’ जैसी शीतल
मौसमों के इम्तिहान में मग्न है
अचानक ’लाइट’ जाने पर
फुक्क भी हो जाती है।

(रफत आलम)

%d bloggers like this: