कैप्टन विक्रमादित्य की शादी और हिम्मत सिंह के कारनामे

साधारण जवान से लेकर सीओ साहब तक पूरी कमान में कैप्टन विक्रमादित्य और उनके सहायक हिम्मत सिंह की जोड़ी वीएचएस के नाम से मशहूर है और उनके किस्से अक्सर क्लब को सेना के जांबाजों के ठहाकों से गुंजा दिया करते हैं। विक्रमादित्य को उनके साथी और अफसर विक्रम के नाम से सम्बोधित करते हैं और हिम्मत सिंह को ऊपर से नीचे तक सभी एच एस के नाम से सम्बोधित करते हैं। खुद विक्रम भी हिम्मत सिंह को एच एस ही कहते हैं। जब से विक्रम कमीशन लेकर सेना में भर्ती हुये एच एस उन्ही के साथ हैं।

वीएचएस की जोड़ी कमाल की है और उन्हे देखकर ऐसा ही लगता है कि अगर सेना ने उन्हे न भी मिलाया होता तब भी कायनात किसी तरह उनका मिलन करा ही देती। शुरु से ही ऐसा रहा कि सुबह सवेरे उठते ही विक्रम एच एस का मुँह देखते थे जो उनकी वर्दी आदि को तैयार करके चाय बनाकर उन्हे उठा देते थे।

बैचलर जीवन में विक्रम पूरी तरह से एचएस पर ही निर्भर थे। उन दोनों की जोड़ी के तमाम किस्से प्रसिद्ध हैं, इस वक्त्त विक्रम की शादी के बाद की घटनायें याद आती हैं।

विक्रम नये नये कैप्टन बने थे और घरवालों ने उनकी शादी करा दी। शादी के दो-तीन दिन बाद ही विक्रम को वापिस आना था। वे अपनी पत्नी, चित्रांगदा, को लेकर छावनी स्थित अपने घर पहुँचे तो रात हो चुकी थी। एच एस ने उनका स्वागत किया। विक्रम ने एच एस को हिदायत दी कि रोज की तरह वह सुबह छ्ह बजे उनके बैडरूम में न पँहुच जाये और न ही दरवाजा खटखटाकर उन्हे उठाये। पर सुबह नौ बजे उनकी मीटिंग है सो उनकी वर्दी आदि सभी तैयार करके रखे।

अगले दिन सुबह अस्तव्यस्त सो रहे विक्रम और चित्रा को कमरे में कुछ आवाज सुनायी दी। विक्रम को रोज की आदत थी सो वे सोते रहे पर चित्रा ने मुँह उठाकर देखा तो उनकी लगभग चीख निकलते निकलते रह गयी। उन्होने विक्रम को हिलाकर उठाया तो वे ऊँघते हुये अंगड़ाई लेते हुये उठकर बैठे। चित्रा ने इशारा किया तो उन्होने पाया कि एच एस उनके बिस्तर की तरफ पीठ करे हुये, जूतों की रैक के पास बैठे जूतों पर पालिश कर रहे थे। वर्दी उन्होने सम्भालकर कुर्सी पर रखी हुयी थी। गनीमत थी कि विक्रम और चित्रा मच्छरदानी के अंदर सो रहे थे।

गाऊन पहनकर विक्रम मच्छरदानी से बाहर निकले। उन्होने देखा कि कमरे का दरवाजा तो अंदर से बंद है।

उन्होने एच एस से पूछा,” एच एस क्या कर रहे हो?”

एच एस ने उठकर उन्हे सेल्यूट मारा और कहा,” साब, वर्दी तैयार कर दी है, जूते चमका रहा हूँ”।

रात को तुमसे मना किया था न कि अंदर मत आना और दरवाजा तो बंद है अंदर कैसे आये?

साब, सुबह जब आया तो याद आया कि वर्दी और जूते तो आपके कमरे में ही रखे हैं, दरवाजा खटखटाने को आपने मना किया था सो दरवाजा खुलवा नहीं सकता था, फिर बाद में मैं खिड़की से अंदर आ गया।

विक्रम की समझ में नहीं आया कि वे एच एस को क्या कहें?

बहरहाल विक्रम तैयार होकर ऑफिस जाते हुये चित्रा से कह गये कि वे लंच के समय घर नहीं आ पायेंगे और एच एस लंच लेने आ जायेंगे, उनके हाथ लंच भिजवा दें।

लंच के समय एच एस घर पंहुच गये, चित्रा ने भोजन तैयार किया हुआ था। उन्होने टिफिन तैयार करके मेज पर रख दिया और एच एस से कहा कि मिनरल वॉटर की बॉटल साथ ले ले।

कुछ देर बाद उन्होने देखा कि एच एस मिनरल वॉटर की बॉटल को सिंक में खाली करके उसमें नल से पानी भर रहे हैं। उन्होने पूछा कि ये आप क्या कर रहे हैं?

मैडम, देखिये कितना पुराना पानी है, छह महीने पहले भरा गया था। मैंने ताजा पानी भर दिया है। साहब तो हमेशा ऐसा ही पुराना पानी बाजार से ले आते हैं, मैं ही तारीख देखकर उसमें ताजा पानी भर देता हूँ। साहब बिल्कुल ख्याल नहीं रखते इन बातों का, आप ध्यान रखना।

उस समय तो चित्रा को लगा कि या तो वे अपने बाल नोंच लें या एच एस का मुँह नोंच दें, पर किसी तरह उन्होने गुस्से को शांत किया।

बाद में तो उन्हे शादी के बाद छावनी में बिताये पहले ही दिन के दोनों किस्से हँसी ही दिलाते रहे हैं। शाम को विक्रम आये तो उनके सामने भी पहली ही बार रहस्योदघाटन हुआ कि मिनरल वॉटर के नाम पर वे नल का सादा पानी ही पीते आ रहे हैं।

एच एस का वे क्या करते? एच एस उनके जीवन का आवश्यक अंग बन चुके थे। फौजी तरीके से सोचने के अलावा एच एस एकदम खरे इंसान हैं।

बाद में तो चित्रा की भी एच एस से खूब छनने लगी।

One Comment to “कैप्टन विक्रमादित्य की शादी और हिम्मत सिंह के कारनामे”

  1. बहुत सुंदर लिखा है .हर तीसरी लाइन पर मुस्कराना पड़ता है पढते पढते स्वत ही .बहुत खूब.

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