मैं, दरवाजा और वह … (कविता – कृष्ण बिहारी)

कल शाम
मुझे अपने घर का दरवाजा कुछ उदास लगा
मैंने उसके कंधे पर धीरे से हाथ धरा और पूछा –
क्या बात है भाई!
तुम कुछ उदास लगते हो।

उसने मेरी तरफ खाली खाली आँखों से देखा
जैसे देखती हो सूनी गली कोई
नवागंतुक को
और फिर पूछा नि:शब्द
किस दुनिया में रहते हो…
तुम्हे आज पता चला?

सच, यकीन करो… मैंने आज ही ध्यान दिया …
असल में इधर कुछ दिनों से मैं… खैर,
बोलो न क्या बात है?

“कुछ नहीं” उसने कहा –
बस, अब तुम मुझे प्यार नहीं करते
कष्ट देते हो
कभी जोर से बंद करते हो
तो कभी खुला छोड़ देते हो,
तुम्हारी यह लापरवाही बजती है मुझ पर
हथोड़े के घन की तरह,
कहें जाने से पहले मुझे चूमना
और वापस आते ही मेरा हाल पूछना
भूल गये हो तुम,
तुम्हारी सुबह अब उस तरह से शुरु नहीं होती
सोचो, मुझे कैसा लगता होगा…
फिर भी, मुझे फर्क नहीं पड़ता
यह तो मेरी नियति है
तुम जिस दिन घर बदल लोगे
मैं भी …बदल…
मुझे तो बस तुम्हारी हालत पर तरस आता है
कैसे हो गये हो तुम?
जैसे गल रहे हो भीतर ही भीतर
तुम्हे देख मेरी छाती में कुछ दरकता है
मन कसकता है
ऊँचे आसमान से मौत की छलांग लगाने का तमाशा
आखिर कब बंद करोगे तुम?

क्या जवाब दूँ …
मुझे खुद भी मालूम नहीं कि
बहुत पहले किसी यादगार दौर की यरह
कभी खुश तो कभी उदास
क्यों होने लगा हूँ …
मेरा हाल सुनकर चौंकोगे…
जैसे पहले बार माँ बनने वाली स्त्री को पता चले कि
गर्भस्थ शिशु चलने लगा है
और वह अकेले में उसकी चाल महसूसे,
खुश हो
वैसे ही मुझे भी अकेले रहना
अच्छा लगने लगा है,
मैं तुम्हे भूला नहीं हूँ …
लेकिन अब
कोई है जो मेरे भीतर रहने लगा है
सोचो, ऐसे में अगर सुध-बुध भूल गई
तुम्हारा ख्याल नहीं आया तो
क्या तुम मुझे माफ नहीं करोगे?
मेरे मित्र,
मैं तुमसे उसकी ढ़ेर सी बातें करना चाहता था
लेकिन डरता हूँ
तुम्हे दुख होगा…

{कृष्ण बिहारी}

One Comment to “मैं, दरवाजा और वह … (कविता – कृष्ण बिहारी)”

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: