विश्वनाथ प्रताप सिंह : कवि और चित्रकार

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को बहुत सारे लोग भारत के सबसे विवादास्पद प्रधानमंत्री भी कहेंगे।

27 नवम्बर श्री वी.पी सिंह की पुण्य तिथि है अगर वे जीवित होते तो इस साल 25 जून को उनका 79वाँ जन्म दिवस मनाया जाता।

लोकनायक जय प्रकाश नारायण के बाद वही ऐसे राजनेता हुये जिन्होने विपक्ष में रह कर भारत की राजनीति में भूचाल ला खड़ा किया।

अस्सी के दशक के अंत में मंडल कमीशन की सिफारिशों के विरुद्ध खम ठोक कर विरोध करने वाले लोग भी श्री वी.पी.सिंह को सिर्फ इसी एक मुद्दे के बलबूते नकार नहीं पायेंगे। अच्छा या बुरा जैसा भी रहा हो उनके द्वारा उठाये गये कदम का परिणाम पर उनके कदम ने भारत की राजनीति की दिशा ही बदल दी, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।

इतिहास ऐसे मुँह नहीं मोड़ सकता भारत के पिछले साठ साल के एक ऐसे राजनेता से जिन्होने ईमानदारी के नाम पर सत्ता हासिल करके दिखा दी। जून जुलाई की भयानक गर्मी में मोटर साइकिल पर सवार होकर उन्होने इलाहाबाद में चुनाव प्रचार किया था और अमिताभ बच्चन द्वारा इस्तीफा दिये जाने से खाली हुयी सीट पर हुये उपचुनाव में श्री लाल बहादुर शास्त्री के सुपुत्र श्री सुनील शास्त्री को हराया था। एसी में बैठ रणनीति बनाने वाले नेताओं के बलबूते की चीज नहीं है ऐसा परिश्रम।

नब्बे के दशक में खुद उनके पास चलकर गया प्रधानमंत्री पद सम्भालने का प्रस्ताव, जिसे उन्होने स्वास्थ्य कारणों से ठुकरा दिया। विरोधाभास निस्संदेह उनके व्यक्तित्व का हिस्सा था। युवावस्था में ही अपनी रियासत की बहुत सारी जमीन उन्होने विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से प्रेरित होकर दान कर दी थी। देहरादून में अपनी करोड़ों अरबों की जमीन उन्होने ऐसे ही छोड़ दी उन लोगों के पास जो नाममात्र का किराया देकर वहाँ दुकानें आदि चलाते थे। श्री वी.पी सिंह उन बिरले राजनेताओं में से रहे हैं जिन पर धन के भ्रष्टाचार का आरोप कोई नहीं लगा सकता।

उन्हे सिर्फ एक राजनेता ही नहीं कहा जा सकता। श्री वी.पी सिंह में कई व्यक्तित्व दिखायी देते हैं और उन्हे सिर्फ किसी एक मुद्दे पर खारिज नहीं किया जा सकता। वे एक बेहतरीन कवि, लेखक, चित्रकार और फोटोग्राफर भी थे।

राजा नहीं फकीर है
देश की तकदीर है

का बेहद सटीक नारा गढ़ने वाला व्यक्ति बेहद सक्रिय और तीक्ष्ण बुद्धि का मालिक रहा होगा जिसकी लेखन क्षमता के बारे में संदेह नहीं किया जा सकता।

मंडल कमीशन लागू करने के सामाजिक और राजनीतिक निर्णय ने उनके व्यक्तित्व को बहुत हद तक भ्रम भरे बादलों के पीछे ढ़क दिया है। उनके राजनीतिक जीवन का मूल्यांकन राजनीतिक इतिहास लिखने वाले लोग करेंगे पर राजनीति से परे उनके अंदर के कलाकार पर तो लेखक और कलाकार समुदाय निगाह डाल ही सकता है।

उनकी कविता में गहरे भाव रहे हैं। उन्होने तात्कालिक परिस्थितियों से उपजी कवितायें भी लिखीं जो काल से परे जाकर भी प्रभाव छोड़ने की माद्दा रखती हैं।

कांग्रेस से इस्तीफा देते समय उन्होने यह कविता भी रची थी।

तुम मुझे क्या खरीदोगे
मैं बिल्कुल मुफ्त हूँ

उनकी कविता आधुनिक है, उसमें हास-परिहास, चुटीलापन भी है और व्यंग्य भी। उनकी कविता बहुअर्थी भी है। बानगी देखिये।

काश उसका दिल एक थर्मस होता
एक बार चाह भरी
गरम की गरम बनी रहती
पर कमबख्त यह केतली निकली।

वे नेताओं के राजनीतिक जीवन की सांझ के दिनों पर भी कविता लिखे बिना नहीं माने।

उसने उसकी गली नहीं छोड़ी
अब भी वहीं चिपका है
फटे इश्तेहार की तरह
अच्छा हुआ मैं पहले
निकल आया
नहीं तो मेरा भी वही हाल होता।

कविता भारत के लगभग हर नेता के जीवन का सच उजागर कर देती है।

आदर्शवाद उनकी कविताओं में भी छलकता है और शायद इसी आदर्शवाद ने उन्हे राजनीति में कुछ खास निर्णय लेने के लिये प्रेरित किया होगा।

निम्नलिखित कविता में नेतृत्व को लेकर कितनी बड़ी बात वे कह गये हैं।

मैं और वक्त
काफिले के आगे-आगे चले
चौराहे पर …
मैं एक ओर मुड़ा
बाकी वक्त के साथ चले गये।

मनुष्य की अंहकार भरी प्रकृति और खासतौर पर समाज में शक्तिशाली व्यक्ति के हथकंडों पर उन्होने एक बेहतरीन कविता लिखी थी।

भगवान हर जगह है
इसलिये जब भी जी चाहता है
मैं उन्हे मुट्ठी में कर लेता हूँ
तुम भी कर सकते हो
हमारे तुम्हारे भगवान में
कौन महान है
निर्भर करता है
किसकी मुट्ठी बलवान है।

मानव मस्तिष्क के अंधेरे बंद कोनों को भी खूब खंगाला उन्होने और कविताओं और पेंटिंग्स के माध्यम से उन्हे अभिव्यक्ति दी।

निराशा का भाव भी उनकी कविताओं में झलकता है और वैराग्य का भाव भी किसी किसी कविता के माध्यम से बाहर आ जाता है।

उनकी एक कविता है मुफ़लिस, जो राजनेता के रुप में उनकी मनोदशा को बहुत अच्छे ढ़ंग से दर्शाती है।

मुफ़लिस से
अब चोर बन रहा हूँ मैं
पर
इस भरे बाज़ार से
चुराऊँ क्या
यहाँ वही चीजें सजी हैं
जिन्हे लुटाकर
मैं मुफ़लिस बन चुका हूँ।

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5 टिप्पणियाँ to “विश्वनाथ प्रताप सिंह : कवि और चित्रकार”

  1. V.P.Singh was one of the greatest Indian who have made their mark after 1947.Had he been had his existence in pre independece days,his ability,character and genius would have ranked him among the greats of that period like Nehru,Patel,Bose except the greatest Gandhi.
    Due to current political compulstions,he is being denied his true value in contemporary social environment and it will result in negative dimensions as heroes will not be born if we do not give them their due recognition.Even,Bharat Ratna is not a reward equal to his status.
    People should recognise his inherent worth as a mark of true tribute.

  2. pahalee baar padhe VP Singh kee kavitaayein. achhchi hain
    Thanks

  3. this is ve ry impartent viwes by you thanks rajendra kashyap

  4. Thanks.
    Pahli bar padhee VP Singh ki kavitayen.
    Pata nahin tha ve kavi aur painter bhi the.
    kavitayen to achi hain. Kash ve PM bhi ache hote

  5. श्रीमान वी पी सिंह साब के चित्रकार और कवि होने के बारे मैं काफी लोग नहीं जानते .उनके इस रूप को मंज़रे आम तक लाने के लिए साधुवाद .

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