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सितम्बर 28, 2010

मन्नू बचपन कब जियेगी…(कविता – रफत आलम)

किताबों का मोल क्या?
वे तो अमूल्य होती हैं
परन्तु
वाह रे नया जमाना
ऐसी अनमोल धरोहर भी
दुश्मन बन गयी है
मन्नू के लिए,
रोज रुलाती हैं
उसे किताबें
जब
भारी बस्ता बन कर
कन्धों पर
चढ़ जाती हैं।


ए फॉर एप्पल
बी फॉर बुक
तीन साल की मन्नू को
रटने की मिली है
बड़ी सजा
मम्मी कसकर दबाती है
नन्ही उंगलिया
आढ़ी-टेढ़ी लिखाती है
सांप सी गिनतियाँ
और वह
चश्मे वाली टीचर
दुश्मन!
धूप में खड़ा कर देती है
मन्नू को
धूप काली डायन बन कर
किताब से डराती है
मन्नू को

ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार
मम्मी रटाती है
नन्ही मन्नु
रोज ही भूल जाती है
मम्मी की डाट खाती है
टप टप
आँखों से तारे
उतर आते हैं
चंदा मामा दूर के
मन्नू को सुनते हैं
|

(रफत आलम)

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