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सितम्बर 22, 2010

अमन की दुआ … ग़ज़ल (रफत आलम)

राम मरा ना रहीम हम लोग मारे जाते हैं
झूठे उसूलों के नाम पर सर उतारे जाते है

वो देखता रहता है आकाश पर बैठा बेबस
उसके नाम लेवा रहम के लिए पुकारे जाते हैं

किसी दिन ज़मीं पर उतर कर देख मालिक
तेरे घरों के आगे से मानव लहू के धारे जाते हैं

यह बताओ आदमी के दिल तक भी पँहुचा कोई
मंदिर मस्जिद के भीतर तो हम सारे जाते हैं

तेरा घर टूटे कि बने क्या तू छोटा हुआ
तेरे नाम पर क्यों बेकसूर लोग मारे जाते हैं

चूना माटी के घर से खुश करने वाले नादानो
उसके नाम के गिर्द तो चाँद तारे जाते हैं

चल अचल सभी मगर पापी मानव के सिवा
सच्ची इबादतों में ये सारे के सारे जाते हैं

सोचता हूँ इनके गले तू बांधता क्यों नहीं
दरिंदे  हुंकारों में तेरा नाम पुकारे जाते हैं

अमन की दुआ कर ’ आलम ’ के लोग कहते हैं
आसमान की तह तक आँसुओं के धारे जाते हैं

(रफत आलम)

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