कमियों को पूरा करने में – (कृष्ण बिहारी)

खोखला होता जाता है इंसान
एक-एक चीज को जमा करते हुये
निचुड़ जाता है जवानी का जोश
उसका रक्त्त
उसकी मज्जा
जाती है सूख
एक-एक चीज को बार-बार गिनने में।


यह हो गया
वह हो गया
वह अभी बाकी है
जैसे कि हर चीज डिग्री हो
जिसे हासिल करना जरुरी हो
जिसके बिना हर योग्यता
अधूरी हो।


बढ़े हुये कागज
परीक्षाओं की सनदें
अनुभवों के प्रमाण-पत्र
भविष्य निधि और बीमें की किश्तें
गहनों की रसीदें
आयकर से बचने के लिये ली गई
पॉलिसियों के पेपर और विकास-पत्र
सब पर लग रही है दीमक
बुढ़ाते जिस्म की तरह
खोखले हो रहे हैं रिश्ते।


सोचता हूँ मैं
सोचते हैं लोग
मकान बन जाये तो चैन मिले
जबकि मालूम है
मकान और मुकदमे से चैन नहीं मिलता
भटकने लगती है रुह मकान में
मकान बनने से पहले
झक्की हो जाता है आदमी
हो जाता है बीमार
मुकदमे का फैसला होने तक
और तैयार हो जाता है
सब कुछ खोने तक।


एक दिन छूट जाती है दुनिया
चीजों को सहेजने और रखने में
मर जाता है एक-एक पल
अपना और पराया परखने में।

{कृष्ण बिहारी}

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10 टिप्पणियाँ to “कमियों को पूरा करने में – (कृष्ण बिहारी)”

  1. “एक दिन छूट जाती है दुनिया
    चीजों को सहेजने और रखने में
    मर जाता है एक-एक पल
    अपना और पराया परखने में।”

    बहुत अच्छा लिखा है. ज़िन्दगी का खरा सच यही है हम सारी उम्र कुछ और-कुछ और की दौड़ में लगे रहते हैं और वक़्त कब हाथ से निकल गया पता ही नहीं चलता

  2. खोखला होता जाता है इंसान
    एक-एक चीज को जमा करते हुये….
    बहुत सुन्दर रचना!

  3. जीवन की बड़ी सुन्दर व्याख्या. इस सुन्दर रचना से परिचित करने के लिए आभार.

  4. एक दिन छूट जाती है दुनिया
    चीजों को सहेजने और रखने में

    bahut achi line likhee hain .

  5. भारत भूमि की आबोहवा का असर जन्म भर पीछा नहीं छोड़ता और घनघोर सुख सुविधाओं के ढ़ेर के बीच कभी भी इन सबकी अप्रासंगिकता दिख ही जाती है। तात्कालिक शांति तो मिल जाती है इन सबमें क्योंकि जीवन आसान हो जाता है पर इससे परे भी जीवन के उद्देश्य हैं यह भाव भारत में जन्मे व्यक्तियों को कभी कभी जकड़ ही लेता है। पुरखे जीन छोड़ गये हैं वैराग्य भाव की, जीवन में रहते हुये सन्यस्त भाव को साधने की

  6. RAAKESH JI BLOG KI SETTING MEN KUCHH KAMIYAN HAIN AAPKE BLOG PAR SAAMAGREE BAHUT ACHCHHI HAI KRIPAYA ISAKI SUNDARATA PAR BHI DHYAAN DEN .
    KAVITA KI AAKHIRI PANKTI BAHUT ACHHI LIKHI HAI ..AADAMII ZINDAGI BHAR APNA PARAAYA PAHCHANATAA RAH JAATA HAI .

  7. धन्यवाद प्रज्ञा जी
    WordPress के उपलब्ध थीम्स को देखते हुए आपके पास कुछ सुझाव हों तो कृपया सुझाकर अनुगृहित करें, आप यहाँ या swaarth [@] gmail [Dot] com पर सुझाव भेज सकती हैं|

  8. rakesh ji agar koi jaannaewala ho usase sahayata lekar theek kar len … theme ka sujhaaw dene bhar se hi baat nahin banegi .

  9. प्रज्ञा जी,
    धन्यवाद!
    किसी भी तकनीकी व्यक्ति की सहायता लें पर उन्हे यह भी तो बताना पड़ेगा कि ठीक क्या करना है?
    या नया क्या करना है?
    आपको यह तो अवश्य ही पता होगा कि कौन से ब्लॉग्स हैं जिन्हे आप स्टैंडर्ड मानती हैं,
    कृपया उनके लिंक देने का कष्ट करें।
    आशा है उनके डाऊनलोड होने में समय नहीं लगता है। कुछ ब्लॉग्स हैं जिन्हे बहुत सारे चित्रों द्वारा आकर्षक बनाया गया है पर उन पर जाकर कुछ पढ़ना ऐसा लगता है कि आज की गति के हिसाब से कुछ महीने नहीं तो हफ्ते जरुर लग जाते हैं उन्हे ढ़ंग से खुलने में।

    और दूसरा खूबसूरती से अलग कोई ऐसी जानकारी जो आप खोजना चाहती हों और न मिल पाती हों?

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