नेता पुराण

विशेषण के वर्गीकरण पर जायें तो ये नेता जी हैं तो उसी बिरादरी के जिसके कभी मनोहर श्याम जोशी जी के “नेताजी कहिन” वाले नेता जी हुआ करते थे पर तब से अब तक यमुना एक गंदे नाले में बदल चुकी है, गंगा में भी प्रदुषण नियंत्रण वालो ने बीओडी सीओडी नापना मापना छोड़ दिया है और बहुत से लोग मान चुके हैं कि अब गंगा किनारे वाली सभ्यता समाप्ति की ओर बह रही है।

सो जब इतने बदलाव आ चुके हैं तो नयी पीढ़ी के नेता जी के रुप, आकार, प्रकृति, प्रवृति और बुद्धि, लालच, क्षमता आदि में भी बदलाव आने स्वाभाविक हैं। विशाल भारद्वाज ने संभवत: अपनी पिछली फिल्म का शीर्षक इन्ही नेता जी के करमों और व्यक्तित्व से उधार लिया होगा। कमीनियत इनमें कूट कूट कर भरी है। इस गुण का हाल ये है कि एक बार इनके एक विरोधी, जो हालाँकि इन्ही की पार्टी के वरिष्ठ सदस्य हैं, ने इनसे नाराज होकर इन्हे डपट दिया था,” क्या कुत्ते की तरह भौंक रहे हो “।

उनका पालतू कुत्ता वहीं खड़ा था वह इस तुलना से इतना नाराज हो गया कि मालिक को काटा तो नहीं पर उनकी वेशभूषा को जरुर तार तार करके डिजायनर वेयर का एक नया और नायाब किस्म का नमूना बना दिया और उनके शरीर पर भी यहाँ वहाँ पंजों से खरोंचे मार दी।

वो तो ये वक्त पर संभल गये वरना कुछ समय पहले इनकी चमचा पार्टी ने तो बाकायदा इन्हे पटा ही लिया था कि कमीनीगिरी के कुछ गुरों पर वर्ल्ड पेटेंट ले लिया जाये। इनके भतीजे ने जो दुनिया के बहुत सारे देशों में भारतीय फिल्मों की पायरेटेड डीवीडी के व्यापार में अच्छा बड़ा हिस्सेदार है, ने इन्हे बता दिया कि चचा क्या कर रहे हो आपसे बड़े बड़े कमीने वैश्विक राजनीति में पड़े हैं और आपकी एप्लीकेशन रिजेक्ट होने के बहुत चांसेज हैं और आपकी जो भी इज्जत है वहाँ इंडिया में उसका फालूदा बन जायेगा, लोग खायेंगे और डकार तक न लेंगे।

नेता जी ने एक बार एक आंदोलन के नाम पर जनता से करोड़ों रुपये जमा कर लिये थे और आज तक किसी को पता नहीं कि उस धन का क्या हुआ। जाने किस की कृपा से एक बार नेता जी, मंत्री भी बन गये थे, उस दौरान सुबह ही झक सफेद कपड़े पहन, माथे पर टीका लगा कर वे कुर्सी पर विराजमान हो जाते थे और अपने चेलों के साथ दिन भर कैसे ज्यादा से ज्यादा धन कमाया जाये इसकी जुगत भिड़ाते रहते थे और मौका मिलते ही पत्रकारों को दी गयी बोलियों की मार्फत हर उस आदमी को हड़काई भेजते रहते थे जो उन्हे भ्रष्टाचार में लिप्त बताता था।

नेता जी की सीनाजोरी का हाल ये रहा है कि एक बार इन्ही की पार्टी की नगर पालिका के स्तर की युवा नेत्री ने इन पर जबरदस्ती शारीरिक शोषण का आरोप लगाया तो इन्होने उसे ही चरित्रहीन बता दिया था और कहा था कि ऐसी स्त्री उनके चरित्र हनन का प्रयास कर रही है। मामला अदालत में जाने तक तो खबरें छपती रहीं बाद में जनता भूल गयी और नेत्री कहाँ गायब हो गयी कोई नहीं जानता।

कुछ समय लो प्रोफाइल रहने के बाद नेता जी फिर सक्रिय राजनीति में अपने गुर दिखाने और अपने खुरों की धार आजमाने पूरे जोर शोर से आ गये और विरोधियों को चुनौती देने लगे कि वे तो खुला खेल फरुखाबादी खेलने आये हैं, जिसमें दम हो सामने आ जाये।

गले में बड़े बड़े रुद्राक्षों के मनकों वाली माला, दोनों हाथों की ऊँगलियों में कम से कम आधा दर्जन अँगूठियाँ पहन किसी तरह से उन्होने अपने दल में महासचिव का पद हथिया लिया और साथ ही उन्होने जुगाड़ कर लिया कि टीवी आदि पर बहस में भी वे दल की तरफ से हिस्सा लेंगे।

एक राज्य में चुनाव होने वाले थे और एक्जिट पोल्स ने इनके दल की हार की संभावना व्यक्त की थी तो इन्होने सारे ऐसे पोल्स को झूठा और विपक्षियों की साजिश बताया। वे कैमरे के सामने  एक्जिट पोल करने वाली संस्थाओं एवम विपक्षी दलों को गरियाते रहे।

हल्ले गुल्ले के मध्य चुनाव हो गये और नेता जी महाश्य टीवी स्टूडियो में चल रहे चुनाव नतीजों पर आधारित कार्यक्रम में शामिल हो गये। चुनाव के नतीजे आने से पहले से ही उन्होने रट लगानी शुरु कर दी थी कि उनके दल को दो तिहाई बहुमत मिलने जा रहा है और उनका दल ही सरकार बनायेगा।

चुनाव नतीजे आने शुरु हुये, वे टीवी पर ही विपक्षी दलों के सदुस्यों से झगड़ा करते रहे। वे एक ही बात बोले जा रहे थे कि उनका दल दो तिहाई बहुमत लेकर रहेगा।

यहाँ तक कि केवल पांच छह सीटों के चुनाव नतीजे रह गये थे और अब तक के नतीजों में उनके दल को बहुमत तो छोड़िये चालीस प्रतिशत सीटे ही मिली थीं। जब चुनाव चर्चा का संचालन कर रहे टीवी जर्नलिस्ट ने उनसे पूछा कि अब आपका क्या कहना है तो तब भी नेता जी दावे कर रहे थे कि उन्हे ही बहुमत मिलेगा।

जर्नलिस्ट ने उन्हे याद दिलाया कि नेता जी गणित पर भी तो ध्यान दीजिये तो नेता जी गरज कर बोले, ये गणित वणित क्या होता है, हमारा दल ही बहुमत से जीतेगा और दो तिहाई बहुमत हमें मिलेगा।

जर्नलिस्ट और विपक्षी दलों के सदस्यों के लिये तो मुश्किल था ही वहाँ स्टूडियो में हँसी रोक पाना, जनता जरुर टीवी पर नेता जी के दावे सुन सुन कर हँस हँस कर दुहरी हुयी जा रही थी।

अगले दिन नेता जी ने प्रेस कांफ्रेंस करके घोषणा कर दी कि चुनाव में धाँधली हुयी है। जब पत्रकारों ने उन्हे याद दिलाया कि पर नेता जी राज्य में सरकार तो आपके ही दल की थी तब दूसरे दल कैसे धाँधली कर सकते हैं तो उन्होने आरोप लगा दिया कि केन्द्र सरकार ने जनता के साथ मिलकर उनके दल के खिलाफ साजिश की है वरना अगर ढ़ंग से निष्पक्ष ढ़ंग से चुनाव हुये होते और ईमानदारी से वोटों की गिनती हुयी होती तो उनके दल को दो तिहाई बहुमत मिलना तय था।

इनके अपने दल में समीकरण कुछ ऐसे पलटे कि इन्हे और इनके जैसे कुछ नेताओं को हाशिये पर डाल दिया गया। ये बहुत कुलबुलाये, बहुत बिलबिलाये पर इनकी ज्यादा चली नहीं।
समीकरण फिर पलटे हैं और वे फिर से कुछ सक्रिय हुये हैं, देखें अब इस बार की पारी में वे क्या गुल खिलाते हैं?

…[राकेश]

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3 टिप्पणियाँ to “नेता पुराण”

  1. Haa haa Neta jee math mein bahut kamjor rahe honge. tabhee 2 tihai bahumat kee baat karate rahe.
    waise ye neta jee kuch jaane pahachane lag rahe hain. is election wali ghatna ko hamein bhee yaad hai humne TV par dekha tha. kahin ye us pradesh kee baat to nahin jahan ke ex CM aajakal bahut charcha mein the?

  2. संजीव जी,

    सारे किस्से सच हैं, यहाँ तक कि कुत्ते वाला भी, अतिश्योक्ति को निकाल दें तो, जो नाटकीयता की आवश्यकता के लिये उधार ली जाती है कभी कभी|

    जरुर आपने देखा होगा चुनाव वाला प्रकरण, बहुतों ने देखा होगा, बहुतों को याद होगा, बहुत भूल गये होंगे। कई नेताओं के मिश्रण से इन नेताजी को जन्मा जान सकते हैं। 🙂

  3. राकेशभाई,जो मुझे पढते वक्त शक हो रहा था.आप की ऊपर की गयी टिप्पणी ने सच साबित कर दिया की यह सत्य कथा पर आधारित है .ऐसे भी मेरा मानना है कोई भी साहितिक लेखन हो कहीं ना कहीं उसमे सच का पुट होता है.अब यह कलम का चमत्कार है,परस्तुती केसी होगी .आप आज के नेता की वस्तविक छवि उकेरने में सफल रहे हैं .मक्कारी,सियारी,बदकारी,बदनियती,चोरी ओर …सारे गलत काम गद्दारी तक नेताओं के आभूषण हैं अँधेरे मैं झांक सकने वाले संजीदा लोगों को ही दिखाई दे सकते हैं .

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