ख़तरनाक डगर

बहुत आसान है …
बहुत आसान है किसी से प्यार कर लेना
चाहने लगना
झूमते हुये बांस के पेड़ों की तरह
हवा को।


बहुत आसान है…
बहुत आसान है किसी को बसा लेना दिल में
सजाना सपने
और फिर देखते रहना
अपलक शून्य में नीले आसमान को।


बहुत आसान है…
बहुत आसान है किसी को छिपा लेना खुद में
बचाने लगना उसे दुनिया की हर अच्छी-बुरी नज़र से
जैसे बचाना हो खुदा को
वरना दुनिया को देखेगा कौन?


मगर,
मगर कठिन है पाना प्यार
गणित के कठिनतम सवाल से भी कठिन
रामानुजम के पास भी नहीं था
इस जटिल समस्या का हल।

और प्यार कोई खेल भी तो नहीं
कि जिसे सभी खेला करें
या कोई ऐसी चाह
जिसके पूरा होने न होने से
कोई फर्क न पड़े
प्यार उखाड़ देता है क्षणों में
बरगद बड़े-बड़े
यह बड़ी ख़तरनाक डगर है।

{कृष्ण बिहारी}

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14 टिप्पणियाँ to “ख़तरनाक डगर”

  1. बहुत सुन्दर बात कही है आपने कविता के माध्यम से..

  2. “या तो किसी को अपना कर लो
    या किसी के हो जाओ”
    में छिपे एक पहलू की कठिनाई को उजागर करती हुयी
    प्रेम पर एक अच्छी कविता|

    तभी कोई दीवाना मन गा गया है
    ” बहुत कठिन है डगर पनघट की “

  3. और प्यार कोई खेल भी तो नहीं
    कि जिसे सभी खेला करें
    या कोई ऐसी चाह
    जिसके पूरा होने न होने से
    कोई फर्क न पड़े
    प्यार उखाड़ देता है क्षणों में
    बरगद बड़े-बड़े
    यह बड़ी ख़तरनाक डगर है।
    बहुत सुन्दर पँक्तियाँ है। लेकिन आज ऐसे प्यार की परिभाषा लोग भूल चुके हैंुआभार

  4. bahut kathin hai…..aap jaisa likhnaa…………………

  5. कवि ने प्यार से असम्पृक्त होकर अपने अनुभव
    के धरातल से प्यार को देखा और लिखा !कवि ने बहुत सच कहा!
    प्यार जैसी रेशमी और रूमानी चीज़ का सच तो यही है कि
    प्यार उखाड़ देता है क्षणों में
    बरगद बड़े-बड़े
    यह बड़ी ख़तरनाक डगर है !
    ..कैसी विडम्बना है !.
    मगर प्यार की खूबसूरती से भी तो इनकार नहीं किया जा सकता है . कवि की कलम से कुछ बात उस एहसास की भी हों जाये तो और बेहतर हों .

  6. मंगलवार 06 जुलाई को आपकी रचना … चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

  7. साभार धन्यवाद संगीता जी

  8. प्यार उखाड़ देता है क्षणों में
    बरगद बड़े-बड़े
    यह बड़ी ख़तरनाक डगर है।

    सच्ची बात है
    बड़ी अच्छी कविता है

  9. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति … उत्तम रचना !

  10. मगर प्यार की खूबसूरती से भी तो इनकार नहीं किया जा सकता है . कवि की कलम से कुछ बात उस एहसास की भी हों जाये तो और बेहतर हों . प्रज्ञा जी से सहमत्।

  11. प्यार की अद्भुत व्याख्या की है आपने…शब्द और भाव का अनूठा मिश्रण है आपकी रचना में…बधाई
    नीरज

  12. sach prem gali ki dagar bahut hi kathin hai,.

  13. प्यार उखाड़ देता है क्षणों में
    बरगद बड़े-बड़े
    यह बड़ी ख़तरनाक डगर है..

    डगर बहुत ख़तरनाक है … पर इस पर चलना जीवन जीने से कम भी तो नही है … अच्छी रचना है …

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