द्वयक्षर श्लोक : केवल दो अक्षरों से कमाल

द्वयक्षर श्लोक में, जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, केवल दो ही अक्षरों का उपयोग करके श्लोक की रचना की जा सकती है।

क्रोरारिकारी कोरेककारक कारिकाकर

कोरकाकारकरक: करीर कर्करोऽकर्रुक

अनुवाद :

क्रूर शत्रुओं को नष्ट करने वाला, भूमि का एक कर्ता,

दुष्टों को यातना देने वाला, कमलमुकुलवत

रमणीय हाथ वाला, हाथियों को फेंकने वाला ,

रण में कर्कश, सूर्य के समान तेजस्वी (था)

(महाकवि माघ की रचना से)

पुनश्च: – एकाक्षर श्लोक [जहाँ केवल एक ही अक्षर (व्यंजन) का प्रयोग किया जा सकता है] का उदाहरण

यहाँ देख सकते हैं।

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4 टिप्पणियाँ to “द्वयक्षर श्लोक : केवल दो अक्षरों से कमाल”

  1. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

  2. अभी तक मैंने एकाक्षर या द्व्यक्षर वाले श्लोक कभी नहीं पढ़े थे | बहुत अच्छा लगा यह जान कर कि एकाक्षर या द्व्यक्षर वाले श्लोक भी होते है |
    गुलाब चन्द जैसल
    केंद्रीय विद्यालय अर्जनगढ़ , नई दिल्ली -४७

  3. जिंदगी चाँद होती तो क्या होता ?
    जिंदगी सूर्य होती तो क्या होता ?
    जिंदगी तारा होती तो क्या होता ?
    जिंदगी फूल होती तो क्या होता ?
    जिंदगी पेड़ होती तो क्या होता ?
    जिंदगी भँवरा होती तो क्या होता ?
    अरे यार इतना मत सोचो !
    जिंदगी चाहे जो भी होती ?
    अच्छा होता , अच्छा होता ||
    गुलाब चन्द जैसल
    केंद्रीय विद्यालय अर्जनगढ़ , नई दिल्ली –47

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