एकाक्षर श्लोक : अदभुत कल्पनाशक्ति का आग्रह

एक ही व्यंजन का पूर्णरुपेण प्रयोग एकाक्षर श्लोक के निर्माण की अनिवार्यता है। और ऐसा करने का प्रयास करने वाले रचियता के लिये अदभुत कल्पना शक्ति का स्वामी होना जरुरी है।

सातवीं सदी में जन्मे महाकवि माघ के “शिशुपाल वध” से एक श्लोक

दाददो दुद्द्दुद्दादि दादादो दुददीददोः
दुद्दादं दददे दुद्दे ददादददोऽददः

नुवाद :

दान देने वाले, खलों को उपताप देने वाले, शुद्धि देने वाले,
दुष्ट्मर्दक भुजाओं वाले, दानी तथा अदानी दोनों को दान देने वाले,
राक्षसों का खण्डन करने वाले ने,
शत्रु के विरुद्ध शस्त्र को उठाया

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6 Responses to “एकाक्षर श्लोक : अदभुत कल्पनाशक्ति का आग्रह”

  1. आईये जानें ….. मैं कौन हूं !

    आचार्य जी

  2. dwyakshar evam ekakshar ke shlok maine pahli bar padhen hain . bahut achchha. chalo aaj yah bh jan gaye ki aise shlok bhi hote hai .

  3. durdaant kalpanaa shakti ………..aise rachanaakaar ko naman

  4. waah wahh
    Aaj tak mujhe yeh pata hi nahi tha..
    Aapka bahut bahit dhanyawaad.

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