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जून 13, 2010

प्रेम, अंहकार और टॉनिक

हजारों की भीड़ में भी
दूसरे हैं इस कारण
अपने होने का अहसास तो रहता है
परन्तु तब भी वजूद के होने की
बात गहरे में नहीं पनप पाती|

यह तो तभी पता चलता है
जब हजारों की भीड़ में से कोई एक
आकर हाथ थाम लेता है|


पहली बार
कोई हमारे अपने कारण
पास आता है|


उसने जैसे कि हम हैं
हमारे उसी रुप को
इन हजारों की भीड़ में से पसंद किया है।

प्रेम का पहला पड़ाव
अंह की तुष्टि तो कर ही जाता है।
उसे पुष्ट करने का टॉनिक तो दे ही जाता है।

... [राकेश]

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