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मई 19, 2010

गर्दभ स्वप्न

बात बहुत पुरानी नहीं है।

गधे इस बार मनुष्य के साथ आर पार की लड़ाई करने के मूड में आ गये और सारे गधों को शहर के बाहर एक खाली मैदान में इकटठा होने का संदेश पहुँचा दिया गया। सारे गधे मैदान में पहुँच गये। गधों के तात्कालिक नेता एक बुजुर्ग गधे ने सब गधों से एक स्वर में नारे लगाने को बोला।

गर्दभ एकता जिन्दाबाद” और ” हर जोर जुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है” जैसे नारों से आकाश गूंज उठा और उनके रेंकने ने इतना शोर उत्पन्न किया कि शहर में घरों की खिड़कियाँ हिल गयी। लोग समझ नहीं पाये कि एकाएक ऐसा शोर क्यों और कहाँ से आया है?

बुजुर्ग गधे ने घोषणा की कि जिस भी गधे को अपना दुखड़ा सुनाना हो वे आगे आकर एक से दो मिनट के बीच अपनी बात रख सकते हैं।

ज्यादातर गधों ने मनुष्यों के उनके प्रति निर्मम व्यवहार का ऐसा सजीव वर्णन किया कि न केवल बोलने वाले बल्कि सुनने वाले गधों की आँखें भी भीग गयीं। सबने मनुष्य के क्रूर व्यवहार के प्रति विद्रोह करने का फैसला लिया।

बुजुर्ग नेता ने सभी गधों से इस फैसले के समर्थन में आगे आकर जमीन पर लोट पोट होकर शपथ लेने का आह्वान किया कि अब से वे भूखों मर जायेंगें पर मनुष्य का काम तब तक नहीं करेंगे जब तक कि वे उनके साथ हमदर्दी का बर्ताव करना शुरु नहीं करते।

आखिरकार मनुष्य का सबसे ज्यादातर काम वे ही करते हैं पर तब भी मनुष्य का प्यार पालतू कुत्तों, घोड़ों और पक्षियों को मिलता है और गधों के साथ न केवल सौतेला बल्कि क्रूरतापूर्ण बर्ताव किया जाता है।

सिर्फ एक गधे को छोड़ कर सभी गधों ने शपथ ले ली। कुछ गधे तो भावातिरेक से इतने भर गये कि उन्होने इस अंदाज में जमीन पर लोट लगायी कि चारों तरफ धूल के बादल छा गये|

बुजुर्ग गधे ने इस नौजवान गधे से पूछा कि वह शपथ लेने आगे क्यों नहीं आया?

नौजवान गधे ने थोड़ा शर्माते हुये कहा कि यूँ तो उसकी हालत कुछ अलग नहीं है और सब गधों से परन्तु उसका भविष्य मनुष्य जाति के साथ रहने के कारण बहुत अच्छा होने वाला है।

सारे गधे उसकी बात सुनकर आश्चर्यचकित रह गये।

उन्होने उसे अपनी बात विस्तार से बताने को कहा और पूछा कि उसके आशावाद का कारण क्या है?

नौजवान गधे ने कहा कि कुछ साल पहले तक तो उसका मालिक एक गरीब आदमी था परन्तु कुछ समय पहले समय ने ऐसा चक्र घुमाया कि लोगों ने उसकी पत्नी को नगर प्रमुख बना दिया। पद एक खास जाति की महिला के लिये आरक्षित हो गया था और मेरे मालिक की पत्नी ही ऐसी थी जो अपनी बिरादरी की महिलाओं से ज्यादा पढ़ी लिखी थी। पत्नी के नगर प्रमुख बन जाने के बाद मेरे मालिक ने ही प्रशासन चलाना शुरु कर दिया और जम कर धन कमाया पिछले कुछ सालों में। जब मेरे मालिक के दिन फिर सकते हैं तो भाग्य पर भरोसा क्यों न किया जाये?

बुजुर्ग गधे ने उसकी तरफ प्रश्नात्मक दृष्टि से देखते हुये पूछा कि परन्तु उसके मालिक के धनी होने से उसके अच्छे भविष्य का क्या संबंध है?

नौजवान गधे के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गयी और उसने बमुश्किल खुशी से चेहरे पर आ जाने वाली हँसी को दबाया। उसने बताया कि दरअसल मेरे मालिक की एक लड़की है और मैने अपने मालिक को अक्सर उसे डाँटते हुये पाया है कि यदि वह ऐसे ही भोंदू बनी कर्म करती रही और पढ़ायी लिखायी में ऐसी ही फिसडडी रही तो उसकी शादी किसी गधे से ही करनी पड़ेगी।

युवा गधा साँस लेने के लिये रुका और उसने उत्सुकता से उसी की तरफ देख रहे गधों पर एक दृष्टि दौड़ाई और आगे कहा कि अब उस घर में मैं ही अकेला गधा हूँ। और यह बात तो आप सब भाईलोग जानते ही हो कि मनुष्य सबसे ज्यादा अपने दामाद को सिर पर चढ़ाकर रखता है। अब बताओ कि मेरा फायदा तुम लोगों के साथ हड़ताल करने में है कि अपने भविष्य की चिन्ता करने में?

फिर सोचो कि नगर प्रमुख का दामाद बन कर मैं अपनी बिरादरी का भी कितना फायदा कर सकूँगा।

बुजुर्ग गधे की समझ में नहीं आया कि वह इस गधे के गधेपन को किस रुप में ले?

पता नहीं इन गधों में से कोई कुछ समझा कि नहीं पर पास से तेजी से गुजरती गाड़ी में बज रहे टेप से आवाज आ रही थी, दिल के बहला लेने को गालिब ये ख्याल अच्छा है

 

…[राकेश]

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