Archive for मई 8th, 2010

मई 8, 2010

प्रेम और समय

जाने कैसे ऐसा होता है
जाने क्यों ऐसे होता है
बीते हुए की स्मृर्तियों के साथ साथ आकर
जाने कब तुम खिलवाड़ करने
लगते
हो
मेरे फुरसत के लम्हों से|

जाने कैसे हज़ारों मीलों लंबी दूरियाँ
यूँ पल भर में तय हो जाती हैं
और फिर समय बीतता तो है
पर इसका एहसास नहीं हो पाता|

समय को खोकर भी मन खुशी पाए
तो कुछ तो जरूर होता है इन भावनाओं में
वरना खर्च करके अपनी संपत्ति
कौन यहाँ खुश होता है?

…[राकेश]

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