Archive for ‘चित्र’

दिसम्बर 9, 2013

शीला…शीला की ज़ुबानी …अरविन्द केजरीवाल की कहानी

AKSD

राजनीति में अहंकार विनाशकारी सिद्ध होता ही होता है|

मनुज  बली नहि होत है,

समय होत बलवान,

भीलन लूटी गोपिका,

वही अर्जुन, वही बान!

समय कब नाचीजों को महाबलियों को धूल चटाने लायक शक्ति दे दे इसके बारे में सिर्फ समय ही जान सकता है|

बड़े बोल बोलना किसी भी नेता के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं इसे शीला दीक्षित की हार, कांग्रेस और भाजपा के द्वारा लगाए लाखों अड़ंगे  के बावजूद हुए अरविन्द केजरीवाल के रानीतिक उत्थान  ने सिद्ध कर दिया है|

अगस्त 14, 2010

पाकिस्तान : बाढ़ का प्रकोप – चंद तस्वीरें

प्रकृति का प्रकोप मानव को यदा कदा सहना ही पड़ता है और ऐसे समय मानव विवश खड़ा दिखायी देता है। विकसित देश अपनी सामर्थ्य और बेहतर प्रबंधन के बलबूते अपनी जनता को कम से कम हानि और परेशानी पहुँचने देते हैं जबकि विकासशील और गरीब देशों में प्राकृतिक प्रकोप कहर बन कर लोगों पर टूट पड़ता है।

इन गरीब और विकासशील देशों का दुर्भाग्य है कि सर्दी, गरमी और बरसात तीनों ही तरीके के मौसम में इन्हे प्राकृतिक प्रकोप की विभीषिका सहनी पड़ती है। प्रकृति के साथ मानव की छेड़छाड़ भी इन प्राकृतिक प्रकोपों को जब तब आमंत्रण देती रहती है।

इन विभीषिकाओं से परे सरकारों का प्रबंधन विचार करने का मुद्दा है।

नीचे दिये गये लिंक में दी गयी तस्वीरें देखें और बाढ़ के द्वारा दर्शायी गयी विनाश लीला को देखें।
चित्र इतने सजीव हैं मानो हरेक चित्र चित्कार कर रहा हो।

पाकिस्तान में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की तस्वीरें

ऐसे समय एक प्रश्न तो उठता ही है कि उसकी बेहतरीन कला की तारीफ कैसे करें क्योंकि कला एक भयानक ट्रेजडी से उत्पन्न दुख और पीड़ा  को उसके नग्न रुप में हमारे सम्मुख रख रही है। इतना विनाश देख कर पीड़ित हो चुके दिल और दिमाग तारीफ करने के काबिल नहीं रहते।

इन चित्रों से कहीं लगता है कि पाकिस्तान कुछ अलग है हमारे भारत से या वहाँ के लोग अलग हैं?

ऐसे ही लाचार लोग वहाँ भी हैं जैसे हमारे यहाँ।

बच्चों के गालों पर आँसू ऐसे ही सूख गये हैं जैस हमारे यहाँ सूख जाते हैं।

कुछ समय पूर्व प्रकाशित, श्री कृष्ण बिहारी जी की कविता मेरे गाँव का मुकद्दर कितना सटीक चित्रण करती है ऐसे माहौल का!

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