Archive for ‘चित्र’

नवम्बर 6, 2014

जिंदगी और मौत की जंग के फोटो ने फोटोग्राफर से आत्महत्या करवाई…

FamineSudanसाउथ अफ्रीकन फोटो जर्नलिस्ट Kevin Carter 1993 के मार्च माह में अकाल को कवर करने के सूडान गये थे, जहां यू.एन के फूडिंग कैम्प के बाहर एक दिल चीरने वाला  दृश्य देखकर उन्होंने दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया|

सूडान में अकाल के कारण भूखमरी से कृशकाय हो चुकी एक बालिका जमीन पर घिसट घिसट कर यू.एन के फूडिंग कैम्प की ओर जा रही है और एक गिद्ध उसके पीछे आकर बैठ गया है इस इंतजार एन कि जल्द ही ज़िंदगी बालिका का साथ छोड़ देगी और उसके लिए भोजन का इंतजाम कर देगी|

इस फोटो को 1994 में अप्रैल माह में पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया और यह फोटो दुनिया भर के अखबारों और पत्रिकाओं में छपा और चर्चा का केन्द्र बना|

भूख से कंकाल बन चुकी अभागिन बालिका का क्या हुआ?  क्या वह बच पाई?

27 July 1994 को Kevin Carter  ने आत्महत्या कर ली|

उनकी कहानी 2010 की Canadian-South African फिल्म – The Bang Bang Club में दर्शाई गई है|

Kevin Carter के सुसाइड नोट में लिखा था -

“I’m really, really sorry. The pain of life overrides the joy to the point that joy does not exist… depressed … without phone … money for rent … money for child support … money for debts … money!!! … I am haunted by the vivid memories of killings and corpses and anger and pain … of starving or wounded children, of trigger-happy madmen, often police, of killer executioners …”

 

अक्टूबर 31, 2014

महात्मा गांधी बनाम अंग्रेज : कार्टूनिस्ट शंकर की निगाह से

गांधी विरोधी ‘अंग्रेजों’ की खिंचाई कार्टूनिस्ट शंकर स्टाइल

लाजवाब, ऐतिहासिक कार्टून

Gandhicartoon

कार्टून : साभार श्री ओम थानवी (जनसत्ता)

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दिसम्बर 9, 2013

शीला…शीला की ज़ुबानी …अरविन्द केजरीवाल की कहानी

AKSD

राजनीति में अहंकार विनाशकारी सिद्ध होता ही होता है|

मनुज  बली नहि होत है,

समय होत बलवान,

भीलन लूटी गोपिका,

वही अर्जुन, वही बान!

समय कब नाचीजों को महाबलियों को धूल चटाने लायक शक्ति दे दे इसके बारे में सिर्फ समय ही जान सकता है|

बड़े बोल बोलना किसी भी नेता के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं इसे शीला दीक्षित की हार, कांग्रेस और भाजपा के द्वारा लगाए लाखों अड़ंगे  के बावजूद हुए अरविन्द केजरीवाल के रानीतिक उत्थान  ने सिद्ध कर दिया है|

अगस्त 14, 2010

पाकिस्तान : बाढ़ का प्रकोप – चंद तस्वीरें

प्रकृति का प्रकोप मानव को यदा कदा सहना ही पड़ता है और ऐसे समय मानव विवश खड़ा दिखायी देता है। विकसित देश अपनी सामर्थ्य और बेहतर प्रबंधन के बलबूते अपनी जनता को कम से कम हानि और परेशानी पहुँचने देते हैं जबकि विकासशील और गरीब देशों में प्राकृतिक प्रकोप कहर बन कर लोगों पर टूट पड़ता है।

इन गरीब और विकासशील देशों का दुर्भाग्य है कि सर्दी, गरमी और बरसात तीनों ही तरीके के मौसम में इन्हे प्राकृतिक प्रकोप की विभीषिका सहनी पड़ती है। प्रकृति के साथ मानव की छेड़छाड़ भी इन प्राकृतिक प्रकोपों को जब तब आमंत्रण देती रहती है।

इन विभीषिकाओं से परे सरकारों का प्रबंधन विचार करने का मुद्दा है।

नीचे दिये गये लिंक में दी गयी तस्वीरें देखें और बाढ़ के द्वारा दर्शायी गयी विनाश लीला को देखें।
चित्र इतने सजीव हैं मानो हरेक चित्र चित्कार कर रहा हो।

पाकिस्तान में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की तस्वीरें

ऐसे समय एक प्रश्न तो उठता ही है कि उसकी बेहतरीन कला की तारीफ कैसे करें क्योंकि कला एक भयानक ट्रेजडी से उत्पन्न दुख और पीड़ा  को उसके नग्न रुप में हमारे सम्मुख रख रही है। इतना विनाश देख कर पीड़ित हो चुके दिल और दिमाग तारीफ करने के काबिल नहीं रहते।

इन चित्रों से कहीं लगता है कि पाकिस्तान कुछ अलग है हमारे भारत से या वहाँ के लोग अलग हैं?

ऐसे ही लाचार लोग वहाँ भी हैं जैसे हमारे यहाँ।

बच्चों के गालों पर आँसू ऐसे ही सूख गये हैं जैस हमारे यहाँ सूख जाते हैं।

कुछ समय पूर्व प्रकाशित, श्री कृष्ण बिहारी जी की कविता मेरे गाँव का मुकद्दर कितना सटीक चित्रण करती है ऐसे माहौल का!

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