कली का दिल फटा
पुष्प महका
बांस का दिल छिदा
बाँसुरी बना
सीप का दिल कटा
मोती जन्मा
आदमी का दिल टूटा
क्या हुआ?
न सुगंध,
न सुर,
न मोल,
एक अनाम दर्द
वह भी लापता
दरक गई धड़कनों के,
न स्वप्न,
न वास्तविकता,
तोड़ दिए गए दिल का,
कोई नहीं मसीहा
(रफत आलम)

