Archive for अगस्त, 2010

अगस्त 21, 2010

सांस ही गति है … कविता (कृष्ण बिहारी)

जब तक है सांस
चलेगा आदमी
रुकेगा नहीं।

सुबह से शाम
शाम से रात
और फिर रात से सुबह तक
बढ़ेगा आदमी
बँधेगा नहीं।

एक धड़कन लिये
सांस को साथी बनाये
ऊँचाइयों की मेहराबों पर
चढेगा आदमी
थमेगा नहीं।

उसके लिये कहीं
न कोई अति है
न कोई समझौता
न तो सहमति है
वह तो जीता है -
एक-एक पल में
उसके लिये तो
सांस ही गति है।

{कृष्ण बिहारी}

अगस्त 19, 2010

दिल चीज़ क्या है : पहुँच गया चीन

साहित्य, संगीत, सिनेमा, और कला की अन्य विधायें कब भाषा और देशों की सीमायें पार कर कहाँ कहाँ पहुँच जाती हैं कोई नहीं कह सकता।

अगस्त 14, 2010

पाकिस्तान : बाढ़ का प्रकोप – चंद तस्वीरें

प्रकृति का प्रकोप मानव को यदा कदा सहना ही पड़ता है और ऐसे समय मानव विवश खड़ा दिखायी देता है। विकसित देश अपनी सामर्थ्य और बेहतर प्रबंधन के बलबूते अपनी जनता को कम से कम हानि और परेशानी पहुँचने देते हैं जबकि विकासशील और गरीब देशों में प्राकृतिक प्रकोप कहर बन कर लोगों पर टूट पड़ता है।

इन गरीब और विकासशील देशों का दुर्भाग्य है कि सर्दी, गरमी और बरसात तीनों ही तरीके के मौसम में इन्हे प्राकृतिक प्रकोप की विभीषिका सहनी पड़ती है। प्रकृति के साथ मानव की छेड़छाड़ भी इन प्राकृतिक प्रकोपों को जब तब आमंत्रण देती रहती है।

इन विभीषिकाओं से परे सरकारों का प्रबंधन विचार करने का मुद्दा है।

नीचे दिये गये लिंक में दी गयी तस्वीरें देखें और बाढ़ के द्वारा दर्शायी गयी विनाश लीला को देखें।
चित्र इतने सजीव हैं मानो हरेक चित्र चित्कार कर रहा हो।

पाकिस्तान में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की तस्वीरें

ऐसे समय एक प्रश्न तो उठता ही है कि उसकी बेहतरीन कला की तारीफ कैसे करें क्योंकि कला एक भयानक ट्रेजडी से उत्पन्न दुख और पीड़ा  को उसके नग्न रुप में हमारे सम्मुख रख रही है। इतना विनाश देख कर पीड़ित हो चुके दिल और दिमाग तारीफ करने के काबिल नहीं रहते।

इन चित्रों से कहीं लगता है कि पाकिस्तान कुछ अलग है हमारे भारत से या वहाँ के लोग अलग हैं?

ऐसे ही लाचार लोग वहाँ भी हैं जैसे हमारे यहाँ।

बच्चों के गालों पर आँसू ऐसे ही सूख गये हैं जैस हमारे यहाँ सूख जाते हैं।

कुछ समय पूर्व प्रकाशित, श्री कृष्ण बिहारी जी की कविता मेरे गाँव का मुकद्दर कितना सटीक चित्रण करती है ऐसे माहौल का!

अगस्त 12, 2010

ब्रूस ली के हैरतअंगेज कारनामे

ब्रूस ली (Bruce Lee) और उनके कारनामे सालों से दुनिया को आश्चर्यचकित करते रहे हैं। एक बानगी देखें उनकी विलक्षण कला की।

और बीच में सांस लेना न भूलें, वह तो खुद इन कारनामों को देखने में व्यस्त हो सकती है। ऊँगलियों को दाँतों से न दबायें, हानिकारक हो सकता है ऐसा प्रयास। कृपया सचेतन होकर वीडियो का लुत्फ उठायें।

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अगस्त 2, 2010

कह देने के बाद… (एक प्रेम कविता: कृष्ण बिहारी)

जब तक कहा नहीं जाये
तब तक ही अमूल्य है प्यार।

कितना असहज था मैं
कहते हुये यह पहली बार
कि करता हूँ
तुमसे प्यार।

जाने कितनी बार
इसे कहने से पहले
चिपकती थी जबान तालू से
और मैं -
न चाहकर भर भी चुप रह जाता था
यूँ ही हर बार।

और अब
कितना आसान
सामान्य सा लगता है
यह कहना
कि
करता हूँ मैं तुमसे प्यार।

याद है-
तुमने कहा था
मुझसे क्या पूछते हो?

कुछ भी नहीं कहता क्या
मेरा यह चुप रहना
और मेरी आँखों का
झुक जाना
लगता नहीं है क्या तुमको
मेरा मौन
समर्पित स्वीकार।

{कृष्ण बिहारी}


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